India Switzerland Relations: मोदी-परमेलिन वार्ता के बाद 5 समझौते, रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर बढ़ा सहयोग
नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में सोमवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच नई दिल्ली में हुई व्यापक वार्ता के बाद दोनों देशों ने 5 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। बातचीत में व्यापार और निवेश के साथ रक्षा उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों में नई गति आई है और दोनों देश इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टेक्नोलॉजी को साझेदारी के प्रमुख आधार के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

5 समझौतों पर बनी सहमति
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच जिन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, उनमें माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप, यंग प्रोफेशनल्स एक्सचेंज, तथा परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा सहयोग शामिल है। विज्ञान, रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से संबंधित सहयोग को भी आगे बढ़ाया गया है।
माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कानूनी और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा देना है। इसमें शिक्षा, विज्ञान और रोजगार के क्षेत्र में मोबिलिटी के रास्ते मजबूत करने के साथ अनियमित प्रवासन और मानव तस्करी से निपटने में सहयोग का प्रावधान है।
भारतीय युवाओं के लिए भी अवसर
यंग प्रोफेशनल्स एक्सचेंज समझौता दोनों देशों के युवाओं को दूसरे देश में प्रशिक्षण और अस्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत शुरुआती तौर पर हर देश से 300 युवाओं का सालाना आदान-प्रदान किया जा सकता है, जिसे भविष्य में 500 तक बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य युवाओं को पेशेवर और भाषाई अनुभव उपलब्ध कराना है।
रक्षा उत्पादन और परमाणु ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग
बैठक में भारत और स्विट्जरलैंड ने सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रक्षा और परमाणु ऊर्जा को लेकर मुख्य घोषणा सहयोग बढ़ाने की सहमति है, इन्हें ऊपर बताए गए 5 हस्ताक्षरित समझौतों की सूची में सीधे शामिल करना सही नहीं होगा।
भारत के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
इससे कृषि उत्पाद, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सामान के भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत में स्विट्जरलैंड से बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन देने पर जोर है।
EFTA समझौते से 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों में India-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत और EFTA देशों के बीच यह समझौता पिछले वर्ष लागू हुआ था।
भारत का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में EFTA से 100 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना और इससे करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में भी साझेदारी
भारत में स्विट्जरलैंड की कंपनियों की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में मौजूदगी पहले से है। प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी रोपवे, जेवर एयरपोर्ट तथा पहाड़ी इलाकों में रेलवे और टनल परियोजनाओं को भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग के उदाहरण के रूप में बताया।
दोनों देशों के बीच परिवहन, मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हुआ समझौता इस सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
विज्ञान, AI और रिसर्च पर भी जोर
भारत और स्विट्जरलैंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त रिसर्च को भी बढ़ावा देंगे। स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नए संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की बात सामने आई है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग और जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित AI को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। स्विट्जरलैंड अगले वर्ष जिनेवा AI Summit की मेजबानी करेगा।
7 अक्टूबर को India-EFTA Prosperity Summit
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की भारत यात्रा के दौरान 7 अक्टूबर को India-EFTA Prosperity Summit भी आयोजित किया जाना है। इसमें भारत और EFTA देशों के कारोबारी एवं निवेश प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य व्यापार और निवेश समझौते को वास्तविक निवेश और कारोबारी अवसरों में बदलना है।
निष्कर्ष
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुई यह वार्ता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, युवा मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान, AI और टेक्नोलॉजी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। ऐसे में यह समझौते भारत के लिए यूरोप में आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



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