जीवांश चिल्ड्रन हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, नवजात की मौत
परिजनों का आरोप—8 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा, प्रतिदिन ₹10 हजार तक वसूले; बच्चे से मिलने की भी नहीं दी अनुमति
दैनिक प्राइम न्यूज़ राजस्थान रिपोर्ट सरनाम पोसवाल धौलपुर। शहर के जीवांश चिल्ड्रन हॉस्पिटल में उपचार के दौरान एक नवजात की मौत का मामला सामने आया है। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चे को करीब आठ दिनों से अस्पताल में भर्ती रखा गया था और उपचार के नाम पर प्रतिदिन लगभग 10 हजार रुपये तक का खर्च बताया जा रहा था।
परिजनों के अनुसार नवजात की तबीयत को लेकर वे लगातार चिंतित थे और बच्चे से मिलने की इच्छा जताते रहे, लेकिन उनका आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें बच्चे से मिलने की अनुमति नहीं दी। परिजन बच्चे की स्थिति के बारे में जानकारी लेने के लिए अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों से लगातार संपर्क करते रहे।
आरोप है कि करीब आठ दिनों तक उपचार चलने के बाद अचानक नवजात की मौत हो गई। बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उपचार के दौरान हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।
परिजनों ने उठाए सवाल
परिजनों का सवाल है कि यदि नवजात की हालत गंभीर थी तो उन्हें उसकी वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई? बच्चे से मिलने से रोकने की वजह क्या थी? आठ दिनों तक चले उपचार के दौरान किस प्रकार का इलाज किया गया और प्रतिदिन लिए जा रहे शुल्क का पूरा विवरण क्या था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविकता
नवजात की मौत के मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की गंभीरता से जांच कराने, अस्पताल के रिकॉर्ड एवं उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच करने तथा यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
सवाल यह है कि निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को पूरी जानकारी देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और ऐसी शिकायतों पर जिम्मेदार विभाग कब सख्त कार्रवाई करेगा?



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