डग 29 अक्टूबर । डग करवाचौथ व्रत के लिए सज धज सवरकर सुबह से शाम तक जब तक चांद नहीं दिखा तब तक निर्जल ही रही। रात को चांद को छलनी में देख पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना की, फिर अपने पति को छलनी में देख पूजा की,व पतियों ने करवे से औरतों को पानी पिला कर व्रत पूण किया महाभारत के समय वनवास के समय अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने चले गए थे। और कई संकेत नहीं मिल रहे थे तो भाई श्री कृष्ण से पति के लिए आग्रह किया तो उन्होंने बताया कि पार्वती ने शिव के लिए व्रत रखा था वही व्रत आप भी रखें और वह करवा चौथ का ही व्रत था।।करवाचौथ पर क्यों करें सोलह श्रृंगार?
राजस्थान
पति की दीर्घ आयु के लिए पतिव्रताओं ने रखा करवा चौथ व्रत।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन हर सुहागिन महिला को सोलह श्रृंगार करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल सुंदरता और सज्जा का प्रतीक है, बल्कि अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना से जुड़ा हुआ है। पूजा से पहले महिलाएं सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, काजल, गजरा, नथ, अंगूठी, झुमके, मांग टीका, मंगलसूत्र, पायल, बिछिया, आलता, मेंहदी, बाजूबंद और कमरबंद आदि पहनकर पूरा श्रृंगार करती हैं। यह श्रृंगार माता करवा को समर्पित होता है, और माना जाता है कि इससे वे प्रसन्न होकर व्रती को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।


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