करौली में 41 फीट ऊंचे रावण के दहन के साथ गूंजा धर्म की विजय का संदेश, आतिशबाजी से जगमगाया आसमान,
भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की सजीव झांकियों ने मोहा मन, राम बारात और राम-रावण युद्ध के मंचन ने बांधा समां,
जागरूक नागरिकों की पहल से पुनर्जीवित हुई रावण दहन की परंपरा, लगातार दूसरे वर्ष भव्य दशहरा महोत्सव का आयोजन,
दैनिक प्राइम न्यूज़ राजस्थान
नरेश गौतम ब्यूरो चीफ करौली। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयदशमी पर्व पर करौली में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिला मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय के पीछे स्थित मैदान में आयोजित भव्य दशहरा महोत्सव में 41 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। भगवान श्रीराम के बाण से रावण का पुतला धू-धू कर जला तो पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा और हजारों शहरवासियों ने धर्म की विजय के इस पावन प्रसंग के साक्षी बनकर विजयदशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया।
विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ
दशहरा महोत्सव का शुभारंभ भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की सजीव झांकियों के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुरूप हुआ। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने माता सीता के साथ आरती एवं पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाए और वातावरण भक्तिमय हो उठा। सजीव धार्मिक झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया तथा रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
राम बारात और राम-रावण युद्ध के मंचन ने मोहा मन
महोत्सव में सजीव कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से राम बारात और भगवान श्रीराम एवं रावण के बीच हुए युद्ध का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को साकार कर दर्शकों को धर्म, मर्यादा और आदर्शों का संदेश दिया। राम-रावण युद्ध के पश्चात भगवान श्रीराम के बाण से 41 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। पुतले में आग लगते ही उपस्थित जनसमूह जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। आकर्षक आतिशबाजी ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया।
जागरूक नागरिकों की पहल से फिर जीवंत हुई परंपरा
करौली में रावण दहन की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा एक समय लगभग विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थी। ऐसे में जागरूक नागरिकों की पहल और सामूहिक प्रयासों से इस परंपरा को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास किया गया। इसी का परिणाम है कि लगातार दूसरे वर्ष भी करौली में भव्य दशहरा महोत्सव का आयोजन हुआ। इस पहल ने न केवल शहर की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी, बल्कि नई पीढ़ी को भी भगवान श्रीराम के आदर्शों और विजयदशमी के आध्यात्मिक महत्व से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
परिवारों के साथ उमड़े शहरवासी, प्रशासन रहा मुस्तैद
दशहरा महोत्सव को लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में परिवारों के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। दर्शकों की सुविधा के लिए महिलाओं और पुरुषों के बैठने तथा कार्यक्रम देखने की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गईं। नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं संभालीं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
दशहरा महोत्सव के दौरान उपखंड अधिकारी राकेश रावत, नगर परिषद आयुक्त, सभापति सुनील कुमार सैनी, उपसभापति अमीरुद्दीन सहित पार्षदगण मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शहरवासियों की उपस्थिति में रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता से परिपूर्ण इस आयोजन ने करौली में विजयदशमी की खुशियों को दोगुना कर दिया।
अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है विजयदशमी
विजयदशमी का पर्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, अन्याय और बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा भी देता है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्मपालन का आदर्श प्रस्तुत करता है। रावण दहन के माध्यम से यही संदेश दिया गया कि चाहे अधर्म कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। करौली में आयोजित भव्य दशहरा महोत्सव इसी आध्यात्मिक संदेश, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना के साथ हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।



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