दैनिक प्राइम न्यूज राजस्थान खुशीराम गुर्जर, केकड़ी
केकड़ी। आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि गुरु वचनों और धर्मोपदेश के श्रवण से मानव जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। सांसारिक भोग-विलास में लिप्त रहने वाला व्यक्ति अक्सर आत्मचिंतन नहीं कर पाता, जबकि धर्मोपदेश उसे जीवन की वास्तविकता समझने का अवसर प्रदान करता है। आत्मचिंतन से मिलने वाला आनंद सांसारिक भोगों में नहीं मिल सकता। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
समय का सदुपयोग करना जरूरी
माताजी ने कहा कि जो व्यक्ति समय की पहचान कर उसका सदुपयोग करता है, वह जीवन में अनेक उपलब्धियां हासिल कर सकता है। इसके विपरीत, समय का महत्व नहीं समझने वाला व्यक्ति कई अवसर गंवा देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय का महत्व समझते हुए अच्छे कार्यों के लिए समय निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आत्मस्वरूप के आनंद में रहने वाला व्यक्ति अपने कर्तव्यों का निर्वहन आसक्ति रहित भाव से करता है और संसार की वास्तविक प्रकृति को समझता है। ऐसा व्यक्ति सांसारिक जीवन में रहते हुए भी मोह-माया के बंधनों में नहीं उलझता।
मन की शांति ही सच्ची सफलता का आधार
आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि सत्ता और समय कभी स्थिर नहीं रहते। इसलिए मन के प्रति संवेदनशील रहते हुए धर्म एवं सत्कार्यों के प्रति अपनी भावना बनाए रखनी चाहिए। मन की शांति और आत्मसंतोष ही सच्ची सफलता का आधार हैं। छोटे-छोटे नियमों को जीवन में अपनाकर तथा त्याग की भावना विकसित करके व्यक्ति आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है।
जिनाभिषेक और शांतिधारा सहित हुए धार्मिक आयोजन
मीडिया प्रभारी रमेश जैन ने बताया कि धर्मसभा से पूर्व आर्यिका संघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा, जिनेंद्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य लाभचंद, राजेश कुमार रामथला परिवार तथा रमेश चंद्र एवं निर्मल कुमार नासिरदा परिवार को प्राप्त हुआ।
धर्मसभा का संचालन बा. ब्र. कनक दीदी एवं पंडित निकेत शास्त्री ने किया। दिलीप जैन ने बताया कि शाम को आरती, भक्ति संगीत, प्रश्नोत्तरी, जिज्ञासा समाधान और आनंद यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।



0 टिप्पणियां
अपनी प्रतिक्रिया साझा करें।